Sahitya Samhita

Sahitya Samhita Journal ISSN 2454-2695

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होलिका दहन Holi Festival

होलिका दहन में हम वास्तव में लकड़ियों और कण्डों तथा कुछ अनुपयोगी वस्तुओं को अग्नि में जलाते हैं ..इसको अगर हम आध्यात्मिक रूप में देखें तो योगाग्नि में अपने कुसंस्कार, अपने बुरे स्वभाव, पुरानी कटु स्मृतियाँ तथा काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, और मात्सर्य, जिन्हें षडविकार कहते हैं..ये मन के छः शत्रु या दुश्मन हैं, इन्हें योगाग्नि में जलाकर अविनाशी आत्मा को शुद्ध करते हैं। कहीं- कहीं उपलों में धागे डालकर भी होलिका जलाने की प्रथा है, वह इस रहस्य का परिचायक है कि यह शरीर उपलों की तरह विनाशी है। एक दिन राख में बदल जाना है और आत्मा अविनाशी है, उसे अग्नि जला नहीं सकती। जैसे होलिका विनाशी है और प्रह्लाद आत्मा की तरह अविनाशी हैं। इस होलिका में आपके सभी कष्ट,सभी दुःख, बुरी प्रवृत्तियां कुसंस्कार, नकारात्मकता, घृणा सभी जलकर भस्म हो जाँय, आपको नवीन ऊर्जा मिले, आपको जीवन में हर वह सफलता मिले जिसे आप पाना चाहते हों।                  ….      
*रंगों के इस महापर्व की आप सबको सपरिवार हार्दिक बधाई..शुभ होली  🌹💐🎉🌹*